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शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012


Saturday, April 21, 2012


UPTET  :  टीईटी भर्ती का विज्ञापन रद करने की सहमति से बेचैनी

सहारनपुर। प्रदेश में 72 हजार से अधिक पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कराई गई शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) देने वाले सहारनपुर मंडल के 22 हजार अभ्यर्थियों की बेचैनी फिर से बढ़ गई है। वजह है टीईटी पर निर्णय के लिए शासन स्तर पर बनी हाई पावर कमेटी की भर्ती के पुराने विज्ञापन को निरस्त करने पर सहमति जताना। अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले पांच छह माह से वे उम्मीदों में ही झूलकर रह गए हैं। विज्ञापन रद होने के बाद नए ढंग से भर्ती प्रक्रिया को किस तरह लिया जाएगा, इसे लेकर भी उनके मन में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। उन्हें अपना भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। गौरतलब है कि गत नवंबर में कराई गई शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए सहारनपुर मंडल से लगभग 38 हजार अभ्यर्थियों ने एग्जाम दिया था। इनमें से लगभग 22 हजार अभ्यर्थी परीक्षा पास करने में कामयाब रहे, लेकिन उनके लिए टीचर बनने की मंजिल करीब आने की बजाय दूर होती चली गई। पहले विधानसभा चुनाव आए, फिर टीईटी में घोटाले के घेरों ने भर्ती प्रक्रिया पर ब्रेक लगाए और अब नई सरकार आने के बाद इस नियुक्ति प्रक्रिया को टीईटी सिस्टम से कराने की बजाय पूर्व के मेरिट सिस्टम से कराने की तैयारियों के बीच हजारों अभ्यर्थियों के हाथों में सिर्फ उम्मीदें ही आईं। टीईटी अभ्यर्थी अनुज कुमार, दीपक कुमार और प्रदीप सिंह कहते हैं कि विज्ञापन स्थगित करने की जो बातें सामने आ रही हैं, उससे तो यही लग रहा है कि प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को फिर से महीनों के लिए उम्मीदों में ही उलझाया जा रहा है। नए सिरे से नियुक्ति कैसे होंगे, क्या नियुक्ति के पद घटेंगे या बढ़ेंगे, नियुक्ति के लिए पूरा सिस्टम क्या रखा जाएगा? अब इन सवालों के जवाब मिलने तक अभ्यर्थी अटके ही रहेंगे।
‘शासन की नीति तय हो, तभी कुछ होगा’
टीईटी अभ्यर्थियों का आगे क्या होना है। इस बारे में अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है। इस बारे में शासन की स्पष्ट नीति तय हो तो ही आगे का कदम उठाया जा सकता है। इसलिए अभी तो इंतजार ही कर सकते हैं।
-संजय उपाध्याय, प्राचार्य डायट, सहारनपुर।

News : Amar Ujala (21.4.1)2

Friday, April 20, 2012

UPTET : अब टीईटी होगी अर्हताकारी परीक्षा

लखनऊ, (जाब्यू) : टीईटी को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की मंशा के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अर्हताकारी परीक्षा का दर्जा दिलाने पर सहमति बनी है।
शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी की मेरिट के आधार पर न करके पूर्व में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अभ्यर्थियों के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट व स्नातक स्तर पर प्राप्त किये गए अंकों के प्रतिशत के आधार पर की जाएगी। इसके लिए उप्र बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 में संशोधन किया जाएगा। विवादों में घिरे टीईटी के पहलुओं पर विचार करने के बाद मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की बुधवार को हुई बैठक में इस पर सहमति बनी है। समिति रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजेगी। इन परिस्थितियों में टीईटी को निरस्त करने की संभावना भी है। उच्च स्तरीय समिति की बैठक में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत अनिवार्य किये गए टीईटी को लेकर एनसीटीई के 11 फरवरी 2011 को जारी निर्देशों पर चर्चा हुई जिसमें टीईटी को सिर्फ अर्हताकारी परीक्षा घोषित किया गया है।

समिति ने इस तथ्य का भी संज्ञान लिया कि एनसीटीई के दिशानिर्देशों पर अमल करते हुए अन्य राज्यों ने भी टीईटी को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सिर्फ अर्हताकारी परीक्षा का ही दर्जा दिया है। समिति ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि बीती 13 नवंबर को हुए टीईटी के परिणाम में जिस तरह से धांधली उजागर हुई है उससे अदालत या किसी अन्य के लिए यह निष्कर्ष निकालना स्वाभाविक है कि इस अनियमितता को अंजाम देने के लिए ही टीईटी की मेरिट को शिक्षकों की नियुक्ति का आधार बनाने का फैसला किया गया यानी यह गोरखधंधा पूर्व नियोजित था।

News : jagran (19.2.12)

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UPTET : कहीं खुशी कहीं गम

छात्र  कहते हैं कि यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल हमेशा बड़ी समस्या रही है। ऐसे में कुछ मुख्यमंत्रियों के समय में रिजल्ट जहां गिरावट प्रदर्शित करता है वहीं कुछ विशेष वर्षो में इसमें खासी वृद्धि हुई। इसलिए इसे आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं शिशिर, सुनील आदि भी ऐसे ही विचार रखते हैं। वहीं दूसरी ओर एक खेमा ऐसा भी है जो इस निर्णय से खुश है। छात्र राजेश कहते हैं कि ज्यादातर राज्यों ने इसे अर्हताकारी परीक्षा ही माना है ऐसे में इसकी मेरिट को चयन का आधार बनाना उचित नहीं है। वह 13 नवंबर को हुई टीईटी में गड़बड़ियों का जिक्र करना भी नहीं भूलते। सदानंद मिश्र इसका विरोध करते हुए कहते हैं कि सही जांच से गड़बड़ियां ठीक भी की जा सकती हैं। कुछ छात्रों के किए की कीमत बाकी लोग क्यों भुगतें। अंतत: 72825 शिक्षकों की भर्ती के मामले न्यायालय की भी प्रमुख भूमिका होने से छात्रों को इंकार नहीं है।

News : Jagran (20.4.12)

UPTET Article By Shyam Dev Mishra ( Blog Visitor )

प्रेषक: Shyam Dev Mishra <shyamdevmishra@gmail.com>
दिनांक: 18 अप्रैल 2012 1:48 am
विषय: Matter for Blog

In view of the news published in Daily dainik jagran on 16th April, 2012, I wish to share following facts with all of the blog-visitors for better and realistic understanding of the issue. Kindly Publish and abolish the confusion creaated by such shallow-reporting. Thanks aand regards.

Yours sincerely, Shyam Dev Mishra

क्या जमाना आ गया है दोस्तों, आज तो हमे अंधे भी रास्ता दिखा रहे हैं!

दैनिक जागरण(16.04.2012) की खबर पढ़कर लग रहा है कि किसी ज़माने में स्व. नरेन्द्र मोहन जैसे कर्मयोगी और निर्भीक पत्रकारों द्वारा प्रेरित  यह समाचार पत्र आज अंधे  मूर्खों द्वारा संचालित या सम्पादित हो रहा है जो पत्रकारिता के विश्वसनीयता और जिम्मेदारी जैसे दायित्वों को दफना चुके हैं. किसी सामान्य पढ़े-लिखे व्यक्ति को भी पता है कि टी.ई.टी. एक्ट नाम का कोई एक्ट नहीं है न ही एन.सी.टी.ई. को कोई एक्ट बनाने का अधिकार है. वास्तव में संसद द्वारा पारित "राईट ऑफ़ फ्री एंड कम्पलसरी एजुकेशन टू चिल्ड्रेन एक्ट, 2010" में एन.सी.टी.ई. को इस एक्ट के दायरे में आनेवाली विद्यालयों में शिक्षकों के तौर पे नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यताएं निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है. एक्ट के अनुसार यदि किसी राज्य में पर्याप्त संख्या में योग्य अभ्यर्थी नहीं है या ऐसी योग्यता प्रदान करने वाले संस्थान पर्याप्त संख्या में नहीं हैं तो केंद्र सरकार, राज्य सरकार द्वारा इस आशय का अनुरोध प्राप्त होने पर एक निश्चित अवधि के लिए, जो एक्ट के प्रभावी होने की तिथि, (01.04.2010) से पांच वर्ष से अधिक न होगीअध्यापक के लिए नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं को एक अधिसूचना के माध्यम से शिथिल कर छूट प्रदान कर सकती है. पर ध्यान दें कि एक्ट में स्पष्ट है कि भले केंद्र सरकार शैक्षणिक योग्यता में भले राज्य के अनुरोध पर अधिकतम पांच वर्ष के लिए छूट दे सकती है पर एक्ट के अनुसार टी.ई.टी. से छूट, एन.सी.टी.ई. तो क्याखुद केंद्र सरकार चाहकर भी नहीं दे सकती जबतक एक्ट में संसद द्वारा संशोधन करके ऐसा प्रावधान  किया जाये जो कि अभी दूर की कौड़ी है. ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री से बी.एड.  डिग्री-धारकों की प्राइमरी स्कूलों में अध्यापक के तौर पर नियुक्ति के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग तो फिर भी क़ानूनी तौर पे सही है पर "विभागीय सूत्रों के मुताबिक" जैसे जुमलों की आड़ में ये चालाक-सह-मूर्ख संवाददाता केवल पन्ना काला करने के लिए मनगढ़ंत बातें, जैसे "एन.सी.टी.ई. के बनाये टी.ई.टी. एक्ट (भारत में ऐसा कोई एक्ट नहीं है) में राज्य सरकारों को अधिकार है कि वह 31 मार्च 2012 तक शिक्षकों की भर्ती के लिए नियम शिथिल कर सकती हैं." गैरजिम्मेदाराना तरीके से फैला रहे हैं. असल में अगर राज्य केंद्र द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत संचालित विद्यालयों के सञ्चालन के लिए दी जानेवाली 65 फीसदी अंशदान पाना चाहता है तो उसे इस अधिनियम के दायरे में नियमावली बनाकर अधिसूचित करना होगा जैसा कि मायावती शासनकाल में किया गया. राज्य को अगर यह मदद चाहिए तो उन्हें एन.सी.टी.ई. द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करना ही होगा, हाँ, पर्याप्त अध्यापन-प्रशिक्षण संस्थान और अर्ह अभ्यर्थी उपलब्ध न होने पर राज्य केंन्द्र सरकार से एक अवधि तक शैक्षणिक योग्यता में शिथिलीकरण का अनुरोध तो कर सकती है, खुद नहीं कर सकती जैसा कि इस अख़बार ने छाप दिया. रही बात हरयाणा की, तो हरियाणा में गैर-टी.ई.टी.उत्तीर्ण शिक्षकों की नियुक्ति की दशा में उनको मिलने वाली केन्द्रीय सहायता में रोक लगनी तय है अगर यह मामला उचित मंचों पर उठाया जाता है. और दूसरी बात, अगर कही कुछ गैर-कानूनी हो रहा है तो हमे भी कुछ गैर-कानूनी करने का अधिकार नहीं मिल जाता. ध्यान दें की यहाँ मैं नैतिक आधार पर सही-गलत की बात नहीं कर रहा, वर्तमान प्रभावी कानूनों के आलोक  में वैध-अवैध की बात कर रहें है.कृपया अख़बार मनोरंजन के लिए भले पढ़े पर कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर स्वयं उचित संसाधनों या जरियों से जानकारी प्राप्त करें न कि जागरण जैसे अख़बारों से.

श्याम देव मिश्रा

UPTET : Email From Naved (Blog Visitor )

प्रेषक: Naved Ahmed <navedahmeds@gmail.com>
दिनांक: 19 अप्रैल 2012 9:38 am
विषय: CLARIFICATION OF NEWS on TET's MEETING



Dear/Respected, BLOG EDITOR I m sending this email as CHAT-BOX is not supportable on my MOBILE, and COMMENT FILTER is on. REAL SITUATION  is just like ELEPHANT, Dainik Jagran ne ELEPHANT ki TAIL pakdi aur NEWS aayi ki, it is ROPE (rassi). Amar Ujala ne ELEPHANT k LEG pakde aur NEWS aayi ki, it is POLE (khamba). Hindustan ne ELEPHANT k EAR pakde aur news aayi ki, it is FAN (pankha). NEWS CHANNELs ne ELKEPHANT ka HEAD chhua aur news aayi, it is MOUNTAIN(pahad), NOW, when either AKHILESH G or JAVED Usmani G came in front and declare that THIS IS ELEPHANT not rope,pole,fan,mountain  ,etc till all situation remains in RUMOURS.


Regards
NAVED

 

 

 

 

 

 

 नये फैसले से जमीन पर आ गये टीईटी के भाव

(UPTET Candidates- price highly down due to new decision )
कानपुर, शिक्षा संवाददाता: शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से सीधे नियुक्ति न देने के शासन के फैसले से टीईटी के भाव जमीन पर आ गये हैं। जिन्होंने हाई मेरिट के चक्कर में लाखों खर्च कर डाले थे वे अब दुखी हैं वहीं दूसरे अभ्यर्थी खुश हैं। पिछली सरकार ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के निर्देशों के विरुद्ध प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को संशोधित कर सीधे टीईटी की मेरिट से नियुक्ति देने का शासनादेश जारी किया था। इसे लेकर तमाम सवाल उठाये गये थे। शिक्षाविदों ने पुरजोर विरोध करते हुए स्पष्ट किया था कि जैसे डिग्री में नेट अर्हता परीक्षा मानी जाती है उसी प्रकार टीईटी को अर्हता परीक्षा ही माना जाना चाहिए। इसके आधार पर नियुक्ति देने से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक व बीएड के प्राप्तांकों का कोई मतलब नहीं रहेगा। दूसरे प्रदेशों में भी टीईटी को मात्र अर्हता परीक्षा ही माना जा रहा है। कुछ छात्रों ने इसे लेकर न्यायालय में वाद भी दाखिल किया था।

उधर टीईटी की मेरिट से सीधे नियुक्ति देने की घोषणा के साथ ही माफिया ने टीईटी में हाई मेरिट दिलाने के लिए चार लाख रुपये का रेट खोल दिया। इसकी आड़ में जमकर वसूली हुई। तत्कालीन शिक्षा निदेशक संजय मोहन सहित आधा दर्जन की गिरफ्तारी और लाखों रुपये की बरामदगी ने पूरी टीईटी को संदिग्ध कर दिया। करोड़ों का खेल सीधे नौकरी पाने की प्रत्याशा में हुआ। शासन के नये फैसले के मुताबिक अब टीईटी क्वालीफाई करने का मतलब शिक्षक पद पर नियुक्ति की अर्हता मात्र होगी।

News : Jagran (21.4.12)

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 शिक्षाविदों ने पुरजोर विरोध करते हुए स्पष्ट किया था कि जैसे डिग्री में नेट अर्हता परीक्षा मानी जाती है उसी प्रकार टीईटी को अर्हता परीक्षा ही माना जाना चाहिए। इसके आधार पर नियुक्ति देने से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक व बीएड के प्राप्तांकों का कोई मतलब नहीं रहेगा। 

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